दुनिया के केंद्रीय बैंकों के बीच अपने स्वर्ण भंडार को सुरक्षित करने की नई होड़ छिड़ गई है। यूरोपीय देश अमेरिका और कनाडा की केंद्रीय बैंकों में बरसों से रखा अपना सैकड़ों टन सोना तेजी से दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर ट्रांसफर कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्त और कूटनीति के जानकार इसे अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच 'भरोसे के गहरे संकट' के तौर पर देख रहे हैं।
नीदरलैंड्स ने 86 टन सोना लंदन शिफ्ट किया
इस पूरी हलचल के बीच नीदरलैंड्स के केंद्रीय बैंक का कदम सबसे ज्यादा चर्चा में है। नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा की तिजोरियों से अपना 86 टन सोना निकालकर लंदन स्थित 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' में रखवा दिया है। डच बैंक का तर्क है कि किसी भी वैश्विक वित्तीय संकट या आपात स्थिति में लंदन से सोना भुनाना या ट्रांसफर करना अमेरिका की तुलना में ज्यादा आसान और त्वरित होगा। नीदरलैंड्स के अलावा कई अन्य यूरोपीय मुल्क भी अपने सोने की खेप स्वदेश या सुरक्षित यूरोपीय शहरों में ला रहे हैं।
क्यों गहराया अमेरिकी तिजोरियों पर अविश्वास?
यूरोपीय देशों की इस घबराहट के पीछे मुख्य रूप से भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका की अंदरूनी राजनीति है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त व्यापारिक व कूटनीतिक नीतियों की आहट ने यूरोप को चौकन्ना कर दिया है।
- संपत्ति ज़ब्ती का डर: यूरोपीय देशों को आशंका है कि किसी कड़े राजनीतिक विवाद या प्रतिबंधों की स्थिति में वाशिंगटन में रखी उनकी संपत्ति को फ्रीज या जब्त किया जा सकता है।
- आपातकालीन पहुंच: यूरोप अपने नियंत्रण क्षेत्र के करीब सोना रखना चाहता है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत नकदी या तरलता (liquidity) जुटाई जा सके।
- लॉजिस्टिक्स और दूरी: अटलांटिक पार अमेरिका से सोना मंगाना संकट के वक्त बेहद मुश्किल हो सकता है, जबकि लंदन या यूरोपीय तिजोरियां ज्यादा सुलभ हैं।
भारत के विदेशी स्वर्ण भंडार का क्या है हाल?
यूरोप में मचे इस तहलका के बाद यह सवाल भी अहम हो गया है कि भारत का कितना सोना विदेशों में जमा है। भारत का भी एक बड़ा स्वर्ण भंडार ऐतिहासिक रूप से 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) में रखा रहा है। हालांकि, बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी सतर्कता बरतते हुए बीते कुछ समय में विदेश में रखा अपना काफी सोना सुरक्षित रूप से भारत की तिजोरियों में वापस मंगाया है, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल का असर देश के सोने पर न पड़े।