छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में हुए चर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। मई 2013 में हुए इस भीषण नरसंहार के करीब 13 साल बाद अदालत की ओर से यह निर्णय आया है। इस हमले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व समेत कुल 28 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
13 साल की लंबी सुनवाई के बाद फैसला
एनआईए की विशेष अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार बनाते हुए दसों अभियुक्तों को दोषी पाया। साल 2013 में जब कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' झीरम घाटी से गुजर रही थी, तब नक्सलियों ने घात लगाकर पूरे काफिले पर हमला बोल दिया था। इस घटना में राज्य के कई कद्दावर नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसने पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
मामले से जुड़े मुख्य बिंदु
- एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने झीरम केस में सभी 10 अभियुक्तों को दोषी ठहराया है।
- यह अदालती फैसला घटना के 13 साल लंबे इंतजार के बाद आया है।
- झीरम घाटी हमले में कुल 28 लोग मारे गए थे, जिनमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेता शामिल थे।
- हमले में जीवित बचे एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह ने फैसले पर अपनी नाखुशी और असंतोष जाहिर किया है।
फैसले के बाद गवाहों ने उठाए सवाल
कोर्ट के इस फैसले के बावजूद मामले से जुड़े पीड़ित पक्ष और प्रत्यक्षदर्शियों में पूरी तरह संतुष्टि नजर नहीं आ रही है। हमले में बाल-बाल बचे एक गवाह ने अदालत के इस फैसले पर अपना असंतोष जताया है। गवाहों और पीड़ितों का मानना है कि घटना के इतने सालों बाद भी इस भीषण साजिश के मूल कारणों और इसमें शामिल अन्य पहलुओं पर अभी भी कई सवाल अनुत्तरित रह गए हैं।