सऊदी अरब की सबसे प्रमुख ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमलों के बाद मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि रियाद और मदीना क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए ये हमले इराक की सीमा के भीतर से दागे गए थे। इस खुलासे के बाद इराक की सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी बढ़ गया है, जिसके जवाब में बगदाद को तुरंत सख्त प्रशासनिक और सैन्य कदम उठाने पड़े हैं।

हमले की भनक लगते ही सऊदी विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है। वहीं इराक में इस घटना के बाद हड़कंप मच गया। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने ईरान की सीमा से सटे मैसान प्रांत के ऑपरेशंस कमांडर को तुरंत प्रभाव से पदमुक्त कर दिया और पूरे मामले की त्वरित जांच के आदेश जारी कर दिए। इसके साथ ही इराकी सुरक्षा बलों ने एहतियाती कदम उठाते हुए ईरान से लगती शलमचेह सीमा चौकी को भी पूरी तरह सील कर दिया है।

इराक की जमीन और ईरानी समर्थित गुटों का दबाव

बीते कुछ समय से इराक पर लगातार यह दबाव रहा है कि वह अपनी जमीन से संचालित होने वाले ईरान समर्थित गुटों पर लगाम लगाए। तेहरान के प्रांतीय नेटवर्क और खाड़ी देशों में जवाबी हमलों के लिए इराकी क्षेत्र एक प्रमुख ठिकाना बनता जा रहा है। हालांकि बगदाद सरकार ने इन गुटों को रोकने की कोशिश की है, लेकिन उसे इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली है। इस ताज़ा घटनाक्रम ने इराक को क्षेत्रीय संघर्ष के बीचों-बीच लाकर खड़ा कर दिया है।

सऊदी के लिए क्यों अहम है ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन?

सऊदी अरब के कच्चे तेल निर्यात के लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी सैन्य हलचलों और तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद यह पाइपलाइन सऊदी के लिए मुख्य विकल्प बनकर उभरी थी।

  • विशाल क्षमता: इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जा सकता है।
  • सुरक्षित मार्ग: फारस की खाड़ी के तनावग्रस्त जलमार्गों को दरकिनार कर लाल सागर तक तेल पहुंचाने का यह सबसे सुगम जरिया है।
  • सप्लाई पर असर: पाइपलाइन बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

क्रूड ऑयल की कीमतों पर असर और यमन का एंगल

एक तरफ जहां सऊदी अपनी ऊर्जा संपत्तियों की सुरक्षा में जुटा है, वहीं यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोही लाल सागर के तटीय इलाकों से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। इस इलाके पर हूथियों के बढ़ते नियंत्रण से समुद्री जहाजों की आवाजाही बाधित होने का खतरा और गहरा गया है। यमन की ओर से सऊदी के ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण सऊदी को अपने कई प्रोजेक्ट्स पर काम रोकना पड़ा है।

इन हमलों की खबर आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल पर बनी हुई है। हालांकि, हमलों के तुरंत बाद आपूर्ति ठप होने की आशंका में ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के करीब पहुंच गया था। अगर लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में यह गतिरोध यूं ही बना रहा, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।