मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को एहतियातन बंद कर दिया है। उपग्रह से मिली तस्वीरों में पाइपलाइन के प्रभावित इलाके में जली हुई जमीन और धुएं का गुबार साफ नजर आ रहा है। जांच में सामने आया है कि इस पाइपलाइन पर हुआ ड्रोन हमला पड़ोसी देश इराक की सीमा से किया गया था। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें उछलकर जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
इराक से हुआ ड्रोन हमला, सैन्य कमांडर पर गिरी गाज
हमले की शुरुआती जांच के बाद इराकी सरकार ने स्वीकार किया कि ड्रोन उसके मैसान प्रांत से छोड़े गए थे, जो ईरान की सीमा से सटा हुआ है। इस बात की पुष्टि होते ही इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय ने मैसान के ऑपरेशन्स कमांडर को तुरंत उनके पद से बर्खास्त कर दिया और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए।
सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, हमले में कुछ लोग घायल हुए हैं और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिसका आकलन अभी किया जा रहा है। इराक के प्रधानमंत्री से फोन पर हुई बातचीत के बाद रियाद ने फिलहाल कोई जवाबी सैन्य कार्रवाई न करने का फैसला लिया है। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह इराक की जमीन से होने वाले हमलों को रोकने के बगदाद के प्रयासों का समर्थन करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए क्यों अहम है यह पाइपलाइन?
यह 1,200 किलोमीटर (745 मील) लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल निर्यातक सऊदी अरब के लिए रणनीतिक रूप से बेहद खास है। इसके जरिए रियाद फारस की खाड़ी के संवेदनशील 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बाइपास करके तेल की सप्लाई करता है।
- शिप ट्रैकिंग एजेंसियों और विश्लेषकों के मुताबिक, यह पाइपलाइन दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 4 से 5 प्रतिशत हिस्सा संभालती है।
- हमले के बाद गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) — जिसमें यूएई, बहरीन, ओमान, कतर और कुवैत शामिल हैं — ने साझा बयान जारी कर इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताया है।
यमन में हूती विद्रोहियों का कब्जा और दोतरफा संकट
सऊदी अरब पर यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने तेजी से आगे बढ़ते हुए देश के तटीय इलाकों के बड़े हिस्से पर अपना कब्जा जमा लिया है। हूतियों का दावा है कि लाल सागर और स्वेज नहर के मुख्य प्रवेश द्वार 'बाब अल-मंदेब' (Bab al-Mandab) जलडमरूमध्य पर अब उनका नियंत्रण है। हालांकि, उनका कहना है कि सऊदी जहाजों को छोड़कर बाकी सभी कंपनियों के व्यावसायिक जहाजों के लिए यह रास्ता सुरक्षित है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के सातवें महीने में प्रवेश करने के साथ ही अरब प्रायद्वीप के दोनों प्रमुख समुद्री रास्तों पर संकट गहरा गया है। एक तरफ यमन में हूतियों की आक्रामक बढ़त और दूसरी तरफ इराक सीमा से पाइपलाइन पर हमला — इन दोहरे झटकों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की किल्लत और कीमतें और बढ़ने की आशंका है।