इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद को गिराए जाने के बाद उसके प्रबंधन से 6.41 करोड़ रुपये का हर्जाना वसूलने के आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने मोहम्मद तनवीर अहमद की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और सहारनपुर के स्थानीय प्रशासन को नोटिस जारी किया है। अदालत ने साफ किया कि मामले की अगली सुनवाई तक हर्जाने की वसूली पर अंतरिम रोक रहेगी।
3 दिन में बुलडोजर चलाने का आरोप, याचिकाकर्ता ने बताया 100 साल पुरानी मस्जिद
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस मस्जिद को 5 सितंबर को ढहा दिया गया था। स्थानीय प्रशासन ने यह कदम एक निचली अदालत के उस फैसले के बाद उठाया था, जिसमें निर्माण को अवैध घोषित किया गया था। यह पूरी कार्रवाई सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत की गई।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पक्ष रखते हुए अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कार्रवाई करने में बहुत जल्दबाजी दिखाई। उन्होंने कहा कि बेदखली का आदेश आते ही महज तीन दिनों के भीतर मस्जिद पर बुलडोजर चला दिया गया।
याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें इस प्रकार हैं:
- मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित जवाब दाखिल कर अवैध निर्माण के सरकारी दावों को खारिज किया गया था।
- विवादित जमीन पर मस्जिद पिछले 100 से भी अधिक वर्षों से मौजूद थी।
- जमीन के मूल मालिक याकूब खान और वाहिद खान थे, जिन्होंने इस संपत्ति को धार्मिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए वक्फ के रूप में समर्पित किया था।
सरकारी रिकॉर्ड में कलेक्ट्रेट की जमीन: अपर महाधिवक्ता
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आधिकारिक राजस्व और सरकारी दस्तावेजों में यह जमीन कलेक्ट्रेट के नाम पर दर्ज है।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहे हैं कि इस जमीन को कब और किस आदेश के तहत वक्फ संपत्ति घोषित किया गया था। इसके अलावा सुनवाई के दौरान कोई वक्फ डीड या पंजीकृत दस्तावेज भी पेश नहीं किया गया। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि जिन मूल भूस्वामियों का हवाला दिया जा रहा है, उन्होंने खुद कभी इस जमीन पर मालिकाना हक का दावा करने के लिए अदालत का रुख नहीं किया।
हाईकोर्ट ने सरकार को दिया 3 हफ्ते का वक्त
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि इस मामले में कानूनी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल करे।
अदालत ने आदेश देते हुए कहा कि जब तक इस मामले की अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक सिटी मजिस्ट्रेट सहारनपुर द्वारा 16 जुलाई के आदेश के तहत लगाए गए 6.41 करोड़ रुपये के हर्जाने की वसूली पर रोक बनी रहेगी।