दक्षिण दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में एक पीजी (पेइंग गेस्ट) इमारत ढहने से सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद अब एक ऐसा दस्तावेज सामने आया है, जिसने हॉस्टल संचालकों की घोर संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। राहत और बचाव कार्य के बीच सामने आए कथित पीजी एग्रीमेंट से पता चला है कि प्रबंधन ने खुद को किसी भी अनहोनी या त्रासदी की जिम्मेदारी से पहले ही पूरी तरह मुक्त कर रखा था।

एग्रीमेंट में लिखी वो शर्तें जो उठा रही हैं सवाल

सामने आए कागजातों के मुताबिक, पीजी प्रशासन ने किरायेदारों के साथ हुए समझौते में कानूनी ढाल तैयार कर रखी थी। इसमें स्पष्ट रूप से दर्ज था कि इमारत के भीतर किसी भी हादसे या शारीरिक नुकसान की स्थिति में हॉस्टल मालिक कोई हर्जाना नहीं भरेगा।

समझौते के दस्तावेज में सुरक्षा से जुड़ी जवाबदेही को खारिज करने के लिए इन बातों को शामिल किया गया था:

  • शून्य मुआवजा नीति: किसी भी व्यक्ति को लगी चोट, शारीरिक क्षति या सामान के नुकसान पर पीजी प्रबंधन द्वारा कोई क्षतिपूर्ति नहीं दी जाएगी।
  • आपदाओं से छूट: इमारत में आग लगने, खराब मौसम या भूकंप जैसी किसी भी स्थिति को हादसे की वजह बताकर संचालक को कानूनी देनदारी से बाहर रखा गया था।
  • जिम्मेदारी से पल्ला: हॉस्टल परिसर में होने वाली किसी भी बड़ी दुर्घटना का दोष पूरी तरह किरायेदारों की किस्मत या हालात पर डाल दिया गया था।

7 जिंदगियां खत्म होने के बाद खड़े हुए गंभीर सवाल

सत्या निकेतन में हुए इस भयावह हादसे में सात लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इसके बाद इस एकतरफा किराएनामे का सार्वजनिक होना यह साफ दिखाता है कि किस तरह सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर कागजी शर्तों के सहारे जिम्मेदारी से बचा जा रहा था। इस खुलासे के बाद अब ऐसे एग्रीमेंट्स के कानूनी वजूद और हॉस्टल संचालकों की जवाबदेही पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।