दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पुरानी इमारत अचानक ढहने से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और राहत टीमों ने मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। इस दुखद घटना के बाद से ही क्षेत्र में मातम का माहौल है और नागरिक प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठा रहे हैं।
एमसीडी कमिश्नर के इस्तीफे पर अड़े छात्र संगठन
हादसे के बाद छात्र संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। छात्र नेताओं ने सीधे तौर पर दिल्ली नगर निगम (MCD) की लापरवाही को हादसे का जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार के इस्तीफे की मांग उठाई है। संजीव खिरवार वही वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो इससे पहले दिल्ली के एक स्टेडियम में अपना कुत्ता टहलाने से जुड़े विवाद के बाद चर्चा में आए थे और उनका तबादला किया गया था।
कई अधिकारी निलंबित, मजिस्ट्रेट जांच का आदेश
इस हादसे पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। शासन की ओर से कार्रवाई करते हुए कई एमसीडी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल के लिए एक मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी किए गए हैं। जांच टीम मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं की पड़ताल करेगी:
- इमारत की ढांचागत मजबूती (Structural Integrity) और निर्माण की स्थिति।
- सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक।
- हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका।
पुरानी इमारतों के नियमों की होगी समीक्षा
सत्य निकेतन की घटना के बाद सरकार अब उन पुरानी इमारतों को लेकर सतर्क हो गई है, जिनका इस्तेमाल रिहाइशी हॉस्टल, पेइंग गेस्ट (PG) या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के रूप में हो रहा है। प्रशासन का कहना है कि शहर में मौजूद ऐसी सभी पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा नीतियों की समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा घटनाओं को रोका जा सके।