दक्षिण दिल्ली का सत्या निकेतन इलाका रविवार को अचानक अफरा-तफरी से भर गया। छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल होने वाली एक बॉयज पीजी इमारत अचानक जमींदोज हो गई। हादसे के बाद चारों तरफ धूल का गुबार और चीख-पुकार मच गई। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों की शुरुआती जांच के मुताबिक, जब यह हादसा हुआ तब इमारत के भीतर लगभग 40 से 50 लोग मौजूद थे।
एम्स ट्रॉमा सेंटर में 3 मरीज भर्ती, हालत बेहद गंभीर
हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंची इमरजेंसी टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। मलबे के नीचे से निकाले गए तीन घायलों को इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया है। एम्स सूत्रों के मुताबिक, तीनों ही मरीजों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इमारत के ढहने से हुए कुल नुकसान और मलबे में दबे सटीक लोगों की संख्या का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन, आसपास की बिल्डिंग खाली कराई गई
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राहत दल 'युद्ध स्तर पर' बचाव कार्य में लगे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि मलबे को हटाने और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कई प्रशासनिक और आपातकालीन टीमें मौके पर तैनात हैं:
- नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) और दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA)
- दिल्ली फायर सर्विसेज और दिल्ली पुलिस की टीमें
- नगर निगम (MCD), सिविल डिफेंस और CATS एम्बुलेंस सेवाएं
सुरक्षा के तौर पर प्रशासन ने हादसे वाली जगह के ठीक बगल में स्थित इमारत को भी एहतियातन खाली करा लिया है, ताकि किसी और तरह का खतरा न रहे।
'हॉस्टल डेज' नाम से चलता था पीजी, स्थानीय लोग भी मदद में जुटे
स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबे में तब्दील हुई यह इमारत एक बॉयज पीजी थी। एएनआई से बात करते हुए एक प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया कि इस जगह का नाम 'हॉस्टल डेज' था और यह पूरी तरह छात्रों के लिए समर्पित पीजी था। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, जैसे ही इमारत गिरी, कमरों के अंदर मौजूद छात्र मलबे के नीचे दब गए।
प्रशासनिक टीमों के पहुंचने से पहले ही आसपास मौजूद लोगों ने अपनी तरफ से राहत कार्य शुरू कर दिया था। तस्वीरों और वीडियो में स्थानीय निवासी बिना किसी मशीनरी के, हाथों से ही मलबा हटाकर दबे हुए लोगों की तलाश करते नजर आए। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इमारत के नाम और फंसे हुए लोगों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।