मॉस्को और बर्लिन के बीच कूटनीतिक रिश्ते अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। रूस ने जर्मनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उस पर नाज़ीवाद को फिर से उभारने का सीधा आरोप लगाया है। रूसी शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि पश्चिमी शक्तियों की मौजूदा नीतियां और बर्लिन का आक्रामक रुख एक 'असली युद्ध' की शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।

नाज़ीवाद के आरोप और कूटनीतिक तल्खी

रूसी विदेश मामलों के विश्लेषकों और सरकारी प्रतिनिधियों ने जर्मन रुख पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मॉस्को के मुताबिक, बर्लिन का रवैया ऐतिहासिक गलतियों से सबक लेने के बजाय नाज़ीवादी विचारधारा को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे रहा है। रूस ने साफ कहा कि यूरोप में बढ़ती सैन्य घेराबंदी और उसके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ लिए जा रहे फैसले इस तनाव की मुख्य वजह हैं।

ड्रोन हमलों के दावों को बताया बेबुनियाद

जर्मनी की ओर से आए ड्रोन घुसपैठ और हमलों से जुड़े बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए रूस ने इन्हें सिरे से नकार दिया है। मॉस्को ने स्पष्ट किया कि इन आरोपों में कोई तथ्य नहीं है और यह रूस के खिलाफ वैश्विक स्तर पर माहौल बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मात्र है।

  • नाज़ीवाद का आरोप: रूस ने जर्मनी की मौजूदा विदेश और सुरक्षा नीतियों को नाज़ीवादी सोच से प्रेरित बताया।
  • 'असली युद्ध' का अलर्ट: ताजा बयानबाजी को मॉस्को ने एक बड़े और वास्तविक सैन्य संघर्ष का आगाज करार दिया है।
  • ड्रोन विवाद: जर्मन सरजमीं या सैन्य ठिकानों से जुड़े ड्रोन आरोपों को रूस ने पूरी तरह खारिज किया।

इस ताजा टकराव ने पूरे यूरोपीय महाद्वीप में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। दोनों देशों के बीच जारी यह वाकयुद्ध केवल बयानों तक सीमित रहेगा या इसके गंभीर रणनीतिक नतीजे निकलेंगे, इस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं।