नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई भयावह फ्लैश फ्लड की तबाही के बीच त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से राहत भरी खबर सामने आई है। निर्माणाधीन प्रोजेक्ट की एक सुरंग में फंसे दो मजदूरों को नेपाली सेना ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। सेना और बचाव दल ने इस सफल रेस्क्यू के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर इसकी पुष्टि की है।

अंधेरी सुरंग से आई आवाज और शुरू हुआ रेस्क्यू

इस खोज और बचाव अभियान में शामिल इंजीनियर व सांसद श्री राम न्योपाने के मुताबिक, सुरंग से सही-सलामत निकाले गए मजदूरों की पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू टीम जब टनल के पास पहुंची तो अंदर फंसे लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। जब टीम ने कहा, 'घबराओ मत, हम बचाने आए हैं', तो अंदर से 'हां' में जवाब मिला। इसके बाद अभियान को तेज करते हुए दोनों मजदूरों को जीवित बाहर निकाला गया।

100 से ज्यादा मजदूरों के फंसे होने का अंदेशा

इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अनुसार, त्रिशूली नदी के पास स्थित इस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से कम से कम 557 मजदूर लापता बताए जा रहे हैं। आशंका है कि इनमें से लगभग 115 लोग टनल के भीतर फंसे हो सकते हैं। नेपाल के संचार मंत्री विक्रम तिमिल्सिना ने भी उम्मीद जताई है कि सुरंग से और मजदूरों को सुरक्षित निकाला जा सकेगा। फिलहाल टनल के गहराई वाले हिस्सों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।

मौतों का आंकड़ा बढ़ा, हजारों लोग अब भी लापता

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के कारण देश में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 1,287 हो गई है, जबकि 4,216 लोग अब भी लापता हैं। इससे एक दिन पहले तक 1,114 मौतों और 3,916 लोगों के गायब होने की सूचना थी।

दूसरी तरफ, चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट में सीमा के तिब्बती हिस्से में 16 मौतों और 546 लोगों के लापता होने की पुष्टि की गई है। इस तरह सीमा के दोनों ओर लापता लोगों की कुल संख्या 4,762 तक पहुंच गई है।

राहत कार्य में जुटे 21 हजार से ज्यादा जवान

आपदा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए लगभग 21,500 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय मदद के जरिए अब तक करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 5,000 से अधिक घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। प्रभावित इलाकों में ठप पड़े लगभग सभी संचार टावरों को फिर से चालू कर दिया गया है।

आपदा के कई दिन बीत जाने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री शाह ने कहा है कि सरकार अब राहत-बचाव के साथ-साथ पीड़ितों के पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करेगी।