अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों को लेकर एक बार फिर विवादों में हैं। ईरान के साथ जारी तनाव और सैन्य संघर्ष की आशंकाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने इसे 'स्मॉल पोटैटोज़' यानी महज मामूली बात करार दिया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।

संवेदनशील मुद्दे पर टिप्पणी से खड़ा हुआ विवाद

मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता और अमेरिका-ईरान के जटिल संबंधों के बीच ट्रंप के इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना माना जा रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जिस मुद्दे का सीधा असर वैश्विक शांति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, उसे हल्के में लेना अंतरराष्ट्रीय राजनीति की गंभीरता के खिलाफ है।

बयान पर उठे प्रमुख सवाल

  • ईरान के साथ जारी गंभीर गतिरोध और युद्ध के खतरे को बेहद सामान्य घटना की तरह पेश किया गया।
  • विश्लेषकों के मुताबिक, इस तरह की अनौपचारिक भाषा से वैश्विक पटल पर गलत संदेश जाता है।
  • राजनीतिक विरोधियों ने इसे ट्रंप के विदेश नीति से जुड़े ढीले-ढाले रवैये का प्रमाण बताया है।

डोनाल्ड ट्रंप पहले भी वैश्विक मामलों पर गैर-पारंपरिक शब्दावली का इस्तेमाल करते रहे हैं। हालांकि, ईरान जैसी क्षेत्रीय ताकत और अमेरिका के बीच टकराव की आशंका को इस तरह आंकने पर विरोधियों को उन पर हमला बोलने का नया मौका मिल गया है।