भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी तल्खी और सीमा तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों की भावी दिशा को लेकर एक स्पष्ट दृष्टिकोण रखा है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि दो बड़े पड़ोसी देशों के बीच प्राथमिकताओं या विचारों में अंतर होना स्वाभाविक है, लेकिन इन मतभेदों को विवाद में तब्दील नहीं होने देना चाहिए।

रिश्तों को संभालने के लिए 3 'म्यूचुअल' का फॉर्मूला

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और चीन के संबंध तभी सामान्य और मजबूत हो सकते हैं, जब दोनों पक्ष तीन बुनियादी सिद्धांतों का ईमानदारी से पालन करें। इन तीन 'म्यूचुअल' सिद्धांतों को द्विपक्षीय रिश्तों की नींव के रूप में रेखांकित किया गया है:

  • आपसी सम्मान (Mutual Respect): दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और कूटनीतिक मर्यादा का सम्मान करें।
  • आपसी संवेदनशीलता (Mutual Sensitivity): एक-दूसरे की मुख्य चिंताओं, सुरक्षा प्राथमिकताओं और संवेदनशीलता को समझें और उन्हें नजरअंदाज न करें।
  • आपसी हित (Mutual Interest): साझा विकास और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए ऐसे रास्ते निकालें जो दोनों पक्षों के हित में हों।

कूटनीतिक लिहाज से क्यों मायने रखता है यह संदेश

सीमा विवाद और कूटनीतिक गतिरोध के दौर में 'मतभेद विवाद न बनें' का यह संदेश भारत के संतुलित और परिपक्व दृष्टिकोण को दर्शाता है। इससे यह साफ होता है कि भारत बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से समान प्रयास आवश्यक हैं। जब तक चीन इन तीन सिद्धांतों को स्वीकार कर जमीनी स्तर पर लागू नहीं करता, तब तक रिश्तों में पूर्ण सुधार संभव नहीं होगा।