राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश की राजधानी दिल्ली में हुए लाल किला वाहन-जनित आईईडी (VBIED) हमले के मामले में एक विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। इस जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विस्फोट करने वाले हमलावर का मुख्य लक्ष्य लाल किला नहीं, बल्कि प्रसिद्ध लाल मंदिर था। घटना वाले दिन इलाके में भीषण ट्रैफिक और पुलिस की मुस्तैदी को देखते हुए आतंकी अपने शुरुआती इरादे को अंजाम नहीं दे सका और उसे अपना प्लान बदलना पड़ा।
लाल मंदिर था प्राथमिक निशाना
एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट के अनुसार, हमलावर विस्फोटक से भरी गाड़ी लेकर लाल मंदिर को निशाना बनाने के लिए निकला था। हालांकि, रास्ते में गाड़ियों का भारी दबाव और जगह-जगह तैनात पुलिसकर्मियों के पहरे ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। मंदिर तक पहुंचने में पकड़े जाने या नाकेबंदी में फंसने के डर से उसने गाड़ी का रुख लाल किला गेट नंबर 4 की तरफ मोड़ दिया। वहां पहुंचकर उसने वाहन में मौजूद आईईडी में विस्फोट कर दिया, जिसकी चपेट में आने से 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
जूते में बने गुप्त मैकेनिज्म से किया धमाका
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में इस हमले की साजिश और उसमें इस्तेमाल की गई तकनीक की बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एनआईए की चार्जशीट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- विस्फोटक सामग्री (IED) को विशेष रूप से वाहन के भीतर सेट किया गया था।
- धमाके को ट्रिगर करने के लिए एक गुप्त रिमोट मैकेनिज्म बनाया गया था।
- इस ट्रिगर डिवाइस को हमलावर ने अपने जूते के भीतर बड़ी चालाकी से फिट किया हुआ था।
- इसी रिमोट मैकेनिज्म के जरिए गाड़ी में मौजूद आईईडी को दूर से ही ट्रिगर करके धमाका अंजाम दिया गया।
राजधानी में पहला वाहन-जनित आईईडी हमला
एनआईए की इस चार्जशीट ने राष्ट्रीय राजधानी में आतंकी तरकीबों के एक खतरनाक मोड़ को रेखांकित किया है। दिल्ली के इतिहास में यह पहला मामला दर्ज किया गया था, जहां आतंकियों ने हमले के लिए किसी वाहन को आईईडी (VBIED) में बदलकर उसका इस्तेमाल किया था। जांच रिपोर्ट में हमले के पूरे घटनाक्रम, आतंकियों की पल-पल की आवाजाही और उनके तकनीकी तौर-तरीकों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है।