पड़ोसी देश इराक की ओर से दागे गए ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब के बेहद महत्वपूर्ण तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इस हमले में सऊदी अरब की 1,200 किलोमीटर लंबी 'ईस्ट-वेस्ट' तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है। रियाद ने एहतियाती कदम उठाते हुए फिलहाल इस पाइपलाइन से तेल की आपूर्ति रोक दी है। हमले में कुछ कर्मचारियों के घायल होने की खबर है, जबकि बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान का सटीक आकलन किया जा रहा है।
इराक के मैसान प्रांत से चला हमला, सैन्य कमांडर बर्खास्त
इराकी प्रधानमंत्री कार्यालय की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि सऊदी अरब पर हुआ यह हमला दक्षिणी प्रांत मैसान के एक इलाके से संचालित किया गया था। हमले की पुष्टि होते ही इराकी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया और मैसान प्रांत में सैन्य अभियानों की कमान संभाल रहे शीर्ष सैन्य कमांडर को तुरंत पद से हटा दिया। हालांकि, अभी तक किसी विशिष्ट समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सऊदी अरब लंबे समय से इराक में सक्रिय ईरान समर्थित लड़ाकों पर अपने तेल ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाता रहा है।
सऊदी का संयम: इराक के अनुरोध पर टाली जवाबी कार्रवाई
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की है, लेकिन साथ ही बगदाद के साथ कूटनीतिक रास्ते खुले रखे हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इराकी प्रधानमंत्री ने अपनी सरजमीं से होने वाले हमलों को रोकने और जरूरी कदम उठाने के लिए थोड़ा वक्त मांगा था। इस आग्रह का सम्मान करते हुए सऊदी अरब ने फिलहाल कोई सैन्य कार्रवाई न करने का फैसला किया है।
रियाद ने हालांकि यह साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता, नागरिकों और सामरिक संपत्तियों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर हर संभव कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। वहीं, इराक ने सऊदी अरब के इस संयम का स्वागत किया है और दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी हिंसक गतिविधि की निंदा की है।
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की सख्त चेतावनी
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए इसे पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक खतरनाक मोड़ करार दिया है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला उसकी क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। अल-बुदैवी ने इराकी प्रशासन से मांग की है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ हमलों के लिए होने से रोके।
युद्ध के दौर में इस पाइपलाइन का सामरिक महत्व
जिस 'ईस्ट-वेस्ट' पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया गया है, वह मौजूदा क्षेत्रीय संकट के बीच सऊदी अरब के लिए जीवनरेखा की तरह काम कर रही थी:
- पश्चिम एशिया में युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे।
- ईरान ने पलटवार करते हुए इजराइल, अमेरिकी सैन्य अड्डों और खाड़ी के प्रमुख शहरों को निशाना बनाया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप हो गई थी।
- सऊदी अरब इसी 1,200 किमी लंबी पाइपलाइन के जरिए समुद्री नाकाबंदी का तोड़ निकालकर अपने तेल का निर्यात कर रहा था।
- हालांकि, 15 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थाई समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला गया था, लेकिन उसके बाद से कूटनीतिक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी है।