भारतीय वायु सेना के जांबाज अधिकारियों की शौर्य गाथाओं में फ्लाइट लेफ्टिनेंट अल्फ्रेड कुक का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। कलाईकुंडा एयरबेस पर हुए हवाई हमले के दौरान उन्होंने जिस सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय दिया, वह भारतीय सैन्य इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। पाकिस्तान के चार घातक सेबर जेट विमानों के सामने अकेले होने के बावजूद उन्होंने पीछे हटने के बजाय सीधे मुकाबले का रास्ता चुना।
कम ऊंचाई पर लड़ा गया भीषण डॉगफाइट
कलाईकुंडा एयरबेस के ऊपर जब दुश्मन के चार सेबर विमान मंडरा रहे थे, तब फ्लाइट लेफ्टिनेंट अल्फ्रेड कुक अपने हंटर लड़ाकू विमान से मुकाबला करने उतरे। संख्या बल के लिहाज से पाकिस्तानी वायु सेना का पलड़ा भारी था, लेकिन कुक ने बिना वक्त गंवाए दुश्मनों को हवा में ही उलझा लिया। जमीन के बेहद करीब, कम ऊंचाई पर यह अफरा-तफरी से भरा डॉगफाइट शुरू हुआ। कुक ने अपने हंटर विमान को बेहतरीन तरीके से मैन्युवर करते हुए दुश्मन के सेबर विमानों पर सटीक निशाना साधा।
गन कैमरे की फुटेज से हुई पुष्टि
इस हवाई जंग के दौरान कुक की सटीक निशानेबाजी से पाकिस्तान का एक सेबर जेट नष्ट हो गया, जबकि दो अन्य सेबर विमान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। मुकाबला खत्म होने के बाद कुक के हंटर विमान में लगे गन कैमरे की फुटेज से इस पूरी हवाई जंग की पुष्टि हुई। कैमरे की फिल्म ने साफ दर्ज किया कि कुक ने दुश्मन के चार में से तीन सेबर विमानों पर सटीक प्रहार किए थे।
पूरे युद्ध के दौरान कार्यशील रहा एयरबेस
पाकिस्तानी वायु सेना का मुख्य मकसद कलाईकुंडा एयरबेस को तबाह कर भारतीय सैन्य अभियान को बाधित करना था। हालांकि, फ्लाइट लेफ्टिनेंट कुक की त्वरित और साहसिक कार्रवाई ने दुश्मन के मंसूबों पर पानी फेर दिया। इस भीषण हमले के बावजूद कलाईकुंडा एयरबेस को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा और वह पूरे युद्ध के दौरान पूरी तरह से कार्यशील रहा।