भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलती भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर बेबाक राय रखी है। उन्होंने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि यूरोप की चीन और अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता अब खुद यूरोपीय देशों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बेल्जियम के पीएम के मुताबिक, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खतरे को लेकर बहुत पहले ही चेताया था, लेकिन तब यूरोपीय नेतृत्व ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसलों पर तंज
नई दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य के दौरान बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनिश्चित आर्थिक नीतियों पर भी टिप्पणी की। ट्रंप प्रशासन द्वारा बार-बार टैरिफ लगाने और हटाने के फैसलों पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे वैश्विक व्यापार में स्थिरता रहे, न कि 'पहले फैसला करें और फिर वापस लें' जैसा रवैया अपनाया जाए।
मौजूदा हालात में यूरोप एक तरफ अमेरिका के आर्थिक दबाव और दूसरी तरफ चीन के आक्रामक व्यापारिक दबदबे के बीच फंसा हुआ महसूस कर रहा है। ऐसे में बेल्जियम के पीएम ने भारत जैसे लोकतांत्रिक और मजबूत आर्थिक भागीदार के साथ रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने की जरूरत बताई।
'भारत दुनिया की कार्यशाला, हमारे पास वैश्विक बाजार'
दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत में व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक क्षमता और निर्माण क्षमता को रेखांकित करते हुए कई अहम बातें रखीं:
- भारत का बढ़ता कद: उन्होंने भारत को 'दुनिया की कार्यशाला' (Workshop of the World) की संज्ञा दी, जहां विशाल उत्पादन क्षमता और तकनीकी कौशल मौजूद है।
- वैश्विक बाजार से जुड़ाव: बेल्जियम और यूरोपीय देशों के पास अंतरराष्ट्रीय बाजारों की समझ और वैश्विक नेटवर्क है, जिसे भारत की विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़कर बड़ा फायदा उठाया जा सकता है।
- सप्लाई चेन में विविधता: चीन पर से अपनी आर्थिक निर्भरता घटाने के लिए यूरोपीय देश अब भारत को एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
रणनीतिक स्वायत्तता और आगे की राह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साझा बयान जारी करते हुए दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। पीएम मोदी ने बेल्जियम के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और बेल्जियम का साथ आना दोनों देशों की प्रगति के लिए बेहद अहम है।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री का यह बयान यूरोपीय संघ के भीतर चल रहे उस मंथन को दिखाता है, जहां अब अपनी सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक प्राथमिकताओं को दोबारा तय किया जा रहा है। यूरोप में अब यह माना जा रहा है कि केवल पारंपरिक सहयोगियों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय भारत जैसे तटस्थ और मजबूत देशों से हाथ मिलाना ही भविष्य का सही रास्ता है।