अमेरिका में एक सरकारी एजेंसी द्वारा जारी किए गए पोस्टर को लेकर सिख समुदाय में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। विवादित बैनर पर सीधे तौर पर 'गेट ऑफ अवर रोड्स, मिस्टर सिंह' (मिस्टर सिंह, हमारी सड़कों से हट जाओ) लिखा गया है। सिख अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि यह भाषा न सिर्फ आपत्तिजनक है, बल्कि एक पूरे समुदाय को संदिग्ध के रूप में चित्रित करने की प्रशासनिक मानसिकता को भी उजागर करती है।
विवाद की मुख्य वजह और आपत्तिजनक संदेश
यह पूरा मामला तब गरमाया जब सड़क सुरक्षा और वाणिज्यिक वाहनों की चेकिंग से जुड़े एक आधिकारिक अभियान में इस विवादित पोस्टर का इस्तेमाल किया गया। पोस्टर में सुरक्षा नियमों की बात करने के बजाय 'सिंह' उपनाम को निशाना बनाया गया, जिससे यह संदेश गया कि सिख चालक सड़कों के लिए खतरा हैं। नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना प्रशासनिक दायरा है, लेकिन किसी विशेष धार्मिक या जातीय पहचान को सार्वजनिक अभियान में घसीटना स्पष्ट रूप से नस्लीय भेदभाव है।
सिख संगठनों का कड़ा रुख और प्रमुख मांगें
अमेरिका में सक्रिय नागरिक अधिकार संगठनों और सिख संस्थाओं ने इस पोस्टर पर कड़ा ऐतराज जताया है। प्रतिनिधियों का कहना है कि इस तरह के विज्ञापनों से अमेरिका में रह रहे सिखों के खिलाफ नफरती अपराधों (hate crimes) का खतरा और बढ़ सकता है।
सिख समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं:
- विवादित अभियानों और पोस्टरों को सभी सार्वजनिक मंचों से तुरंत हटाया जाए।
- संबंधित सरकारी विभाग सार्वजनिक रूप से इस पूर्वाग्रहपूर्ण भाषा के लिए माफी मांगे।
- विज्ञापन को मंजूरी देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- सरकारी एजेंसियों में विविधता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता से जुड़ा प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।
अमेरिका की सप्लाई चेन और सिख ड्राइवरों का योगदान
अमेरिका के कमर्शियल ट्रकिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सिख समुदाय की बहुत बड़ी हिस्सेदारी है। दूरदराज के इलाकों तक सामान पहुंचाने और देश की सप्लाई चेन को बनाए रखने में भारतीय मूल के सिख ट्रक ड्राइवर अहम भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद, 9/11 के बाद से ही इस समुदाय को अक्सर नस्लीय टिप्पणियों और पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता रहा है। इस ताजा घटनाक्रम ने सिख ड्राइवरों के बीच सुरक्षा और आत्मसम्मान से जुड़े नए सवाल खड़े कर दिए हैं।