11 सितंबर 2001 को हुए भयावह आतंकवादी हमलों से ठीक पहले अमेरिकी प्रशासन ओसामा बिन लादेन और उसके संगठन अल-कायदा से पैदा हो रहे खतरे से अच्छी तरह वाकिफ था। इसके बावजूद, उस दौर में वाशिंगटन की सबसे बड़ी कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी चिंता बिन लादेन नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार गहराता तनाव था।
दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर अमेरिका का ध्यान
दक्षिण एशिया के दो परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच युद्ध जैसे हालात अमेरिकी रणनीतिकारों के लिए बेहद संवेदनशील मामला थे। अमेरिका को डर था कि सीमा पर जारी तल्खी किसी बड़े सैन्य टकराव का रूप न ले ले। यही वजह थी कि तत्कालीन अमेरिकी विदेश नीति और खुफिया तंत्र की प्राथमिकताओं में अल-कायदा की गतिविधियों के मुकाबले भारत-पाक तनाव को सुलझाना सबसे ऊपर था।
प्राथमिकताओं का विश्लेषण
अंतरराष्ट्रीय मामलों और भू-राजनीति की जानकार तथा 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की पत्रकार पृषा पटनायक के अनुसार, 9/11 से ठीक पहले का समय वैश्विक राजनीति का एक ऐसा मोड़ था जहां वाशिंगटन की प्राथमिकताएं काफी अलग थीं। लंदन विश्वविद्यालय के 'गोल्डस्मिथ्स' से शिक्षित पृषा के इस विश्लेषण से साफ होता है कि अमेरिका किस तरह बिन लादेन से मिलने वाली चेतावनियों के बावजूद अपनी ज्यादातर ऊर्जा दक्षिण एशिया के कूटनीतिक संकट को टालने में लगा रहा था।